सन 1996 कि बात है, उस जमाने में कामिक्स का नशा सर चढ़ कर बोला करता था(वैसे बोलता तो अभी भी वैसे ही है :D).. मगर घर में पापा-मम्मी कामिक्स के धुर-विरोधी हुआ करते थे.. मगर एक दिन "जैसे हर कुत्ते का एक दिन होता है" मेरा भी दिन आया, और पापा जी मुझे बोले कि "जाओ बच्चा तुम्हे सौ रूपये देता हूँ.. इसमें जितना कामिक्स खरीद सकते हो खरीद लो.." उनकी यह वाणी मुझे किसी आकाशवाणी से कम नहीं लगी.. ठीक वैसे ही जैसे महाभारत में देवकी के ब्याह के समय कंस को आकाशवाणी सुनाई दिया था.. (वैसे कभी कभी सोचता हूँ कि महाभारत काल और उसके आस पास के काल मे इत्ते सारे आकाशवाणी क्यों लोगों को सुनाई देता था?? :o ;))
अब एक अंधे को क्या चैये, बस दो ऑंखें.. उस समय मैं बिक्रमगंज नामक शहर में रहता था, जो बिहार के रोहतास(सासाराम) जिले में अवस्थित है.. वहाँ राज कामिक्स मिलता नहीं था और मैं अपने अमूल्य सौ रूपये डायमंड कामिक्स के चाचा चौधरी जैसे कामिक्स पर खर्च करने को तैयार नहीं था.. अब विकट स्थिति जान पड़ी.. करें तो क्या करें.. बस संभाल कर रख लिया वह सौ रूपया, सोचा "केकयी" जैसे ही समय आने पर इसका उपयोग करूँगा और बेचारे पापा मना भी नहीं कर पायेंगे..
फिर वो दिन भी आया जब पापाजी को किसी मीटिंग में डेहरी-ऑन-सोन जाना था और साथ में हम भी लटक लिए.. पापाजी गए मीटिंग के अंदर और हम उनके बॉडीगार्ड साहब को लेकर पहुँच गए वहाँ के रेलवे स्टेशन.. ध्रुव या नागराज का कोई कामिक्स तो मिल ही जायेगा, इसी उम्मीद में.. और वहाँ से ख़रीदे तीन कामिक्स.. तीनो के तीनो ही ध्रुव के..
- "स्वर्ग कि तबाही"
- "दलदल" और
- "ब्लैक कैट"
जिसमे से स्वर्ग कि तबाही ध्रुव कि एक दूसरी कामिक्स का आखरी भाग था, उसके पहले भाग का नाम आदमखोरों का स्वर्ग था.. इन दोनों कामिक्स को मैं पहले भी आपके सामने ला चुका हूँ जिसका लिंक उन कामिक्स के नाम के साथ दे रहा है मैंने.. Link Deleted on request of Sanjay Gupta Ji..
दूसरी कामिक्स "दलदल" अपने आप में पूरी कामिक्स थी.. आगे पीछे कोई भी रोवनहार नहीं था उस कामिक्स का, मतलब कोई दूसरा भाग नहीं था.. :)
और तीसरी कामिक्स "ब्लैक कैट" के साथ भारी पंगा हो गया.. लेते समय मैंने देखा नहीं और पढ़ने पर पता चला कि यह तो पहला भाग है.. अब दूसरा भाग कहाँ से आये.. भारी लोचा.. अब तो पटना आयें तो यहाँ पता करे उसके दूसरे भाग के बारे में.. डेहरी-ऑन सोन जाए तो फिर वही चक्कर.. पटना के पुस्तक मेला में भी मेरे घूमने कि वजह सिर्फ यही कामिक्स थी(उस जमाने में साहित्य भगोरों में मेरा नाम अव्वल हुआ करता था सो किसी साहित्यिक पुस्तक मैं खरीदने से रहा.. वैसे मेरा मानना है कि कामिक्स भी साहित्य के ही किसी श्रेणी का हिस्सा है :)).. "रोबो का प्रतिशोध" नाम था उसके दूसरे भाग का.. सबसे बड़ी मुसीबत तो यह कि पहले भाग में ध्रुव को बुरी तरह घायल दिखा दिया था.. मन में सवाल यह नहीं था कि वह बचा या नहीं, क्योंकि उसकी नई कामिक्स लगातार आ रही थी(ही ही ही :D).. सवाल यह था कि वह बचा तो कैसे बचा..
खैर एक दिन ब्रह्म देव मुझ पर भी प्रसन्न हुए और मेरी मुह मांगी मुराद पूरी हो गई.. मुझे यह कामिक्स मिली पटना जंक्शन के पास वाले एक बुक स्टोल पर(मीठापुर सब्जी मार्केट के कोर्नर वाला बुक स्टोर).. और पढकर दिल को उतनी ही ठंढक मिली जितनी कि एक बच्चे को कुत्ते कि पूंछ खिंच कर मिलती है(ही ही ही :D)..
फिलहाल तो आप भी इसे पढ़िए.. :)

चूंकि इसमें अपनी कुछ यादें भी जुडी हैं सो सोचता हूँ कि इसे अपने दूसरे ब्लॉग पर भी डाला जाए.. :) शायद तीन-चार दिन बाद..
मुझे वह अच्छी लगाती थी, और मैं उसे कभी-कभी नताशा कह कर बुलाता था.. वह मुझसे पूछती थी कि ये नताशा कौन है, मैं बस कहता कि ऐसे ही.. अब उससे कौन कहे कि मेरा पहला प्यार का नाम नताशा ही है.. मैं दिल ही दिल में खुदा को शुक्रिया अदा करता था कि वह कामिक्स नहीं पढ़ती थी.. कुल मिलकर कुछ ऐसा ही नशा हुआ करता था उस कामिक कैरेक्टर का..
पिछले पोस्ट में गौतम जी ने मुझे भी मेरा पहला प्यार याद दिला दिया.. मेरा शुरू से ये मानना रहा है कि हर पीढ़ी का अपना अलग हीरो होता है.. जैसे मुझ से ४-५ साल पहले कि पीढ़ी का वेताल हुआ करता था कमोबेश वैसा ही मेरे उम्र के लोग अपना हीरो ध्रुव और नागराज जैसे कैरेक्टर में ढूँढते रहे.. फिर कब जवान हुए और कब प्यार हुआ कुछ पता ही नहीं चला.. मेरी कई मित्र भी हैं जिसे अपना पहला प्यार ध्रुव या डोगा में दिखता रहा है, वहीँ कईयों को नागराज भी खूब भाता रहा है..
नताशा का पहला परिचय ग्रैंड मास्टर रोबो में कराया गया था.. मैंने बहुत पहले कभी ग्रैंड मास्टर रोबो नामक कामिक्स पोस्ट भी की थी जिसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं.. नताशा का पिता रोबो जो अपराध की दुनिया का बादशाह हुआ करता था, जब तक की वह ध्रुव से नहीं टकराया था.. नताशा उसके रोबो ट्रूप्स की कमांडर हुआ करती थी.. फिर जब वह चंडिका उर्फ श्वेता को जान पर खेल कर उसकी जान बचाते देखती है तो अपराध की दुनिया छोड़ देती है.. वैसे पूरी कहानी पढ़ने के लिए आप ग्रैंड मास्टर रोबो वाले लिंक से उस कामिक्स को डाउनलोड कर सकते हैं..
अब बढते हैं अगले प्रेम की ओर.. ऋचा.. वह भी ध्रुव के कामिक्स की ही कैरेक्टर है.. जो छद्म वेश रखकर ब्लैक कैट भी बनती है और अपराधियों से भी लड़ती है.. खाली समय में वह जिमनास्ट है, वही साथ में एक सुपर कम्प्युटर जीनियस भी.. आप फिलहाल ब्लैक कैट की पहली कामिक्स पढ़े, बाकी अगले पोस्ट में अपने एक और प्यार के साथ लौटता हूँ.. वैसे भी यह कामिक्स दो भागों में बनती हुई है.. सो मुझे जल्द ही आना है दूसरा भाग पोस्ट करने के लिए.. :)
"ब्लैक कैट" कामिक्स का डाउनलोड लिंक

आप कामिक्स डाउनलोड करने के लिए ब्लैक कैट कामिक्स की तस्वीर पर भी क्लिक कर सकते हैं..
जैसा मैंने पहले कहा था की मैं आने वाले पांच कामिक्स के साथ गुजारे हुये अपने जीवन के कुछ हसीन पल भी आप लोगों के साथ बाटूंगा और वैसा कुछ ही मैं इस कामिक्स के साथ भी करने के इरादे में था.. मगर मैं यह पोस्ट लिखता उससे पहले ही मुझे इस कामिक्स से संबंधित एक बहुत ही जबरदस्त कहानी आरकुट के एक कम्यूनिटी में मिल गई.. तो आज मैं आप लोगों के सामने ए.पी.दुबे जी की कहानी पेश कर रहा हूं.. मगर उससे पहले मैं आप लोगों के सामने इनका कुछ परिचय भी देता चलूं(जैसा मुझे इनके आरकुट प्रोफ़ाईल से मिला है)..
कामिक्स के बहुत बड़े पंखे(फैन) हैं यह महाशय.. बचपन से ही कामिक्स के दिवाने, खासकर के सुपर कमांडो ध्रुव के.. इन्होंने तो अपने होने वाले संतानों के नाम तक सोच लिया है(उसकी भी एक अलग कहानी है जो फिर कभी).. अगर लड़का हुआ तो ध्रुव और यदी लड़की हुई तो श्वेता(मेरे इस चिट्ठे को पढ़ने वाले कई पाठ्क ध्रुव के बारे में बहुत ज्यादा नहीं जानते हैं, सो उनके लिये यह जानकारी - ध्रुव की छोटी बहन का नाम श्वेता है).. यह अभी हाल फिलहाल में एक साईट भी शुरू किये हैं जिस पर आप यहां क्लिक करके पहूंच सकते हैं.. तो चलिये आज सुनते हैं इनकी दिलचस्प कहानी जो ध्रुव के कामिक्स चुंबा का चक्रव्यूह के साथ जुड़ी हुई है.. यह कहते हैं -

यह कहानी है तड़ित चालक के बारे में, जो मैंने ध्रुव के किसी कामिक्स में पढ़ा था.. ठीक-ठीक याद नहीं मगर शायद मैं आठवीं या नवमीं कक्षा में था जिस समय की यह घटना है.. हमारी शिक्षिका तडित चालक के बारे में हमें पढ़ा रही थे और उन्होंने कक्षा से पूछा, "कोई तडित चालक के बारे में जानता है?" मेरे और मेरे ही एक सहपाठी के अलावा और किसी ने हाथ नहीं उठाया..
हमारी शिक्षिका ने सबसे पहले मुझसे ही पूछा और मैंने उन्हें विस्तार पूर्वक बताया.. मेरे उत्तर से पूर्णतः संतुष्ट होने के बाद उन्होंने मुझसे पूछा की कहां से तुम्हें यह जानकारी मिली? मैंने बताया कि पिछले साल मैंने एक कामिक्स में इसके बारे में विस्तार से जाना था और उन्हें मेरी बातों पर भरोसा नहीं हुआ.. तब मेरे एक सहपाठि ने मेरी बातों का समर्थन किया जो अभी का मेरा सबसे अच्छा मित्र है.. और हमने कहा कि हम आपको कल यह सारी बात कामिक्स में भी दिखा देंगे..
अगले दिन मेरा मित्र उस कामिक्स के साथ विद्यालय आया लेकीन गणित के शिक्षक को एक लड़के ने बता दिया कि मेरा मित्र अपने स्कूल बैग में कामिक्स लेकर आया है.. हमारे गणित के शिक्षक ने हमें इसकी सजा देनी चाही मगर हम दोनों ही इसके लिये तैयार नहीं थे, क्योंकि हम दोनों की ही नजर में हमारी कोई गलती नहीं थी जो हम सजा भुगतते.. हमने कहा कि कृप्या हमारी विज्ञान की शिक्षिका को बुलाया जाये..
हमारे गणित के शिक्षक ने हमारी विज्ञान की शिक्षिका के साथ-साथ हमारे प्रधानाध्यापक को भी बुला लिया.. और उन सबके सामने हमने बताया कि हमने कहां से तडित चालक के बारे में पढ़ा था.. हमारी विज्ञान की शिक्षिका ने ना सिर्फ हमे शाबासी दी वरन् हमें पूरी कक्षा के सामने हीरो जसा बना दिया और वह भी प्रधानाध्यापक के सामने..
इन सब चीजों के परे, मुझे इस घटना से मेरा सबसे अच्छा मित्र मिल गया.. :)
आप इस कामिक्स को पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाकर कामिक्स ऑर्डर कर सकते हैं..
आप भी तडित चालक के बारे में जानने के लिये पढ़ सकते हैं चुंबा का चक्रव्यूह, पृष्ठ नंबर 34.. :)
कल मैं अपनी एक मित्र मुक्ता से फोन पर बात कर रहा था जो कुछ मजेदार सा था.. उसी का एक अंश मैं यहां लिख रहा हूं..
मैं : "उस दिन मैं पूरे दिन भर तुम्हारा इंतजार करता रहा और तू नहीं आयी.. अबे अगर नहीं आना था तो फोन कर देती या मैसेज दे देती.."
मुक्ता : "अरे यार मैं बोली थी ना की मैं उस दिन आफिस चली गयी थी.."
मैं : "नहीं तू बोली थी की तू उससे एक दिन पहले सैटरडे को आफिस गयी थी.. अब मैं घर से खाने का सामान लाया हूं तो लालची की तरह मेरे घर आना चाह रही है.."
मुक्ता : "अच्छा गलती हो गई.. अब डांटो मत.."
मैं : "ठीक है नहीं डाटूंगा मिल तो पिटाई करता हूं.."
मुक्ता : "पिटाई तो मैं करूंगी तेरा.."
मैं : "क्यों?"
मुक्ता : "बस ऐसे ही मन कर रहा है.."
मैं : "अब तो तू मेरे हाथ से पिटने के लिये तैयार रहो.."
मुक्ता : "तू लड़की पर हाथ उठायेगा?"
मैं : "हां.."
मुक्ता : "तू ऐसा नहीं कर सकता है.. मुझे मालूम है तू लड़की पर हाथ नहीं उठाएगा.."
मैं : "कभी बचपन में कामिक्स पढी है सुपर कमांडो ध्रुव का?"
मुक्ता : "हां.. पर क्यों पूछ रहा है?"
मैं : "वो लड़की पर हाथ नहीं उठाता था.. तू क्या मेरे को सुपर कमांडो ध्रुव समझ रखी है? मैं लड़कीयों पर हाथ के साथ-साथ पैर भी उठा सकता हूं.."
मुक्ता : "अबे तू वही है सुपर कमांडो ध्रुव, लेकीन मुझे ना मारना.. समझा? तू भी क्या याद दिला दिया.. सुपर कमांडो ध्रुव.."
सम्मीलित हंसी.. "हा हा हा हा...."मैंने यह पोस्ट 21 मार्च सन् 2008 को अपने चिट्ठे मेरी छोटी सी दुनिया पर पोस्ट किया था.. चूंकी यह पोस्ट कामिक्स से जुड़ी मेरी जिंदगी का एक हिस्सा ही है सो आज मैं इसे यहां भी पोस्ट कर रहा हूं.. मेरे अगले पोस्ट में आप चुंबा का चक्रव्यूह पढ़ सकते हैं.. और हां भूले नहीं, साथ में होगी इस कामिक्स से जुड़ी मेरे बचपन की एक कहानी भी.. :)
आप ध्रुव कि कौन सी कामिक्स पढ़ना चाहते हैं वाले पॉल में दूसरे स्थान पर यही दोनों कामिक्स आयी थी जिसे मैंने इस पोस्ट का शीर्षक बनाया है.. और अपने उस पोस्ट में किये वादे के मुताबिक चलते-चलते आपको इससे जुड़ी बचपन कि कहानी भी सुनाते चलना है..
बात सन् 1994 की है.. मैं उस समय 13 साल का था और चक्रधरपुर(जो अब झारखंढ में है) में रहता था.. उसी समय मेरे छोटे चाचाजी कि शादी तय हुयी थी और इंगेजमेंट के लिये मुझे और मेरे पापाजी को पटना से होते हुये दरभंगा जाना था.. हमें पटना के लिये ट्रेन पकड़ने के लिये पहले चक्रधरपुर से जमशेदपुर जाना था और वहां से पटना के लिये ट्रेन पकड़नी थी.. हम इस्पात एक्सप्रेस से घंटे भर में समय से जमशेदपुर पहूंच गये.. हमारे पास अभी भी 1 घंटे का समय था.. जैसा कि मैं पहले भी बता चुका हूं कि बचपन में हम बच्चों को कामिक्स खरीदने कि सख्त मनाही थी, मगर हमें ट्रेन में कामिक्स खरीदते समय मना नहीं किया जाता था.. सो इस मौके को मैं गवाना नहीं चाहता था और पहूंच गया कामिक्स के स्टॉल पर..
वहां नयी-नयी कामिक्स "मैंने मारा ध्रुव को" स्टॉल पर टंगी हुई थी.. मैंने आव ना देखा ताव और झट से कामिक्स खरीद ली.. ये भी नहीं देखा कि इसका कोई अगला भाग तो नहीं है? ये भी नहीं सोचा कि अगर इसका अगला भाग भी होगा तो वो कभी पढ़ने को मिलेगा या नहीं.. मैं उचक कर ट्रेन में अपने जगह पर बैठकर कामिक्स पढ़ने लगा, और जब तीन कहानी खत्म हो गयी फिर जाकर पता चला कि ये तो आधी ही है.. और फिर उदास हो गया.. ये उदासी ज्यादे देर तक नहीं रही क्योंकि अपने चाचाजी की इंगेजमेंट में जो जा रहा था..
"हत्यारा कौन" कामिक्स मुझे पटना आने के बाद शायद सन् 1997 में पढ़ने को मिली.. मगर इसका रोमांच तब तक कम नहीं हुआ था.. :)
चलते-चलते कुछ इन कामिक्स की भी बात कर ली जाये.. मेरी नजर में यह दोनों ही कामिक्स ध्रुव के कामिक्स का मील का पत्थर कहा जा सकता है, जिसमें रोमांच अंत तक बना रहता है.. शुरूवात होते ही एक बड़ा झटका लगता है कि ध्रुव मर कैसे गया, मगर मन में यह बात भी रहती है कि नायक कभी मरता नहीं, और एक विश्वास भी मन में होता है कि वो अंत में वापस जरूर आयेगा.. इन दोनों कामिक्स का प्रमुख किरदार "कंकालतंत्र" ही-मैन के कामिक्स का "स्केलेटन" का नकल भर ही है जिसके पास काफी कुछ उसी के जैसी शक्तियां भी है.. मगर फिर भी कहानी काफी चुस्त है.. दो कामिक्स में छः कहानियों को पढ़ने का अनुभव भी अलग ही है.. इसमें ध्रुव के लगभग सारे खलनायकों को एक जगह इकट्ठा किया गया है जिसमें वैज्ञानिकों के साथ-साथ तंत्र-मंत्र सम्राट चंडकाल भी है.. फिलहाल पूरी कहानी जानने के लिये आप यह कामिक्स डाऊनलोड करके पढ़िये.. :)
लिंक
मैंने मारा ध्रुव को का डाऊनलोड लिंक
हत्यारा कौन का डाऊनलोड लिंक
डाऊनलोड करने के लिये आप तस्वीर पर भी क्लिक कर सकते हैं..
संजय गुप्ता जी के अनुरोध पर डाउनलोड लिंक हटाया जा रहा है..
मैं मेरठ से दिल्ली 8 मार्च को 3 बजे दिन मे पहूंचा और रिगल, कनाट प्लेस के पास चला गया क्योंकि वहां मुझसे मिलने वंदना आ रही थी.. लगभग आधे घंटे बाद वो आई और उसके साथ मैं लगभग 4:45 तक रहा.. फिर वहां से हम दोनों ही पैदल ही टहलते हुये नई दिल्ली रेल्वे स्टेशन की तरफ बढ चले.. मेरा अपना अनुमान था की रीगल से स्टेशन तक जाने में लगभग 20 मिनट लगना चाहिये और मेरी ट्रेन 5:20 पर थी.. मतलब मेरे पास 15 मिनट बच रहा था अपनी ट्रेन पकड़ने के लिये..
मेरा अनुमान ट्रैफिक ने गलत साबित कर दिया और जब मैं स्टेशन पहूंचा तो 5:10 हो रहे थे.. अब मैंने वंदना को कहा की अब आप यहीं से वापस जाओ क्योंकि अगर मैं आपके लिये प्लेटफार्म टिकट लिया तो मुझे मेरी ट्रेन छोड़नी परेगी.. फिर उससे विदा लेकर प्लेटफार्म के अंदर घुस गया.. मैं पहाड़गंज के तरफ से अंदर गया था और पिछली बार जब मैंने संपूर्णक्रांती पकड़ी थी तो वह 9 या 10 नंबर से रवाना होती थी.. सो मुझे पता था की मेरे पास ज्यादा समय नहीं है.. इस बार तो वह 12 से जाने वाली थी..
मैं लगभग भागते हुये 12 नंबर पहूंचा.. समय देखा तो 4 मिनट बचे हुये थे.. सामने देखा तो S1 डब्बा था और मुझे B3 में जाना था.. मैंने कुली से पूछा की B3 कहां है तो पता चला की S1 से S10, फिर एक पैंट्री कार है और उसके बाद B1, B2 फिर जाकर B3 है.. मैंने फिर से भागना शुरू किया मगर मन में ये तसल्ली थी की ट्रेन अब नहीं छूटने वाली है..
बचपन से ही हम बच्चों के लिये ट्रेन से सफर करने का मतलब कोई कामिक या कहानी की किताब और ढेर कुछ ना कुछ खाते जाना होता था.. अब भैया दीदी तो सुधर गये हैं मगर मैं अपने घर का बच्चा होने का कर्तव्य अभी भी निभा रहा हूं.. :D जब मैं अपने डब्बे की तरफ भाग रहा था तभी मुझे एक किताब की दुकान पर कामिक दिख गई.. अब तो मैं सोचा चाहे दौड़कर ही मुझे ट्रेन पकड़नी परे मगर मैं पहले कामिक तो जरूर खरीदूंगा.. मैं अभी तक कामिक पढने का शौकीन हूं मगर चेन्नई में मुझे हिंदी कामिक नागराज, ध्रुव, डोगा वाली नहीं मिलती है.. मगर मैं भी पीछे नहीं हूं.. नेट से राज कामिक के साईट पर जाकर खरीदता हूं.. सो अधिकतर कामिक मेरी पढी होती है.. मैंने उसके पास जितनी कामिक थी वो सारी जल्दी-जल्दी में पलट डाली और 4 कामिक निकाल कर उसे दिया और कहा, "कितने का हुआ भैया, जल्दी बताओ.." वो हक्का बक्का होकर मेरा चेहरा देख रहा था.. सोच रहा होगा की इतना बड़ा होकर भी बच्चों वाला शौक.. :) मगर मुझे जो अच्छा लगता है मैं बस वही करता हूं.. आज तक दुनिया की कभी परवाह नहीं कि की दुनिया क्या सोचती है.. उसने मुझे बताया 120 की हुई.. मैंने बिना दाम जोड़े ही उसे 120 पकड़ाये और फिर दौड़ पड़ा अपने डब्बे की तरफ.. डब्बे पर अपना नाम चेक किया और डब्बे में चढ गया.. जब तक मैं अपनी सीट तक पहूंचता तब-तक ट्रेन खुल गई.. बाद में मैंने दाम जोड़े तो बिलकुल सही पाया.. :)

राज कामिक्स मेरा जूनून आजकल राज कामिक्स का पंच लाईन बना हुआ है जिसे मैंने शीर्षक के रूप में प्रयोग किया है..:) अभी कुछ दिन पहले नागराज के ऊपर सिनेमा बनाने के लिये एक अमेरिकन स्टूडियो ने राज कामिक्स के साथ करार भी किया है.. उम्मीद है अगले साल तक वो सिनेमा हमारे बीच भी होगी..
मैंने यह लेख बहुत पहले 29 मार्च सन 2008 को अपने ब्लौग छोटी सी दुनिया के लिये लिखा था जिसे आज मैं यहां भी पोस्ट कर रहा हूं और यही वह पोस्ट है जिसने मुझे यह ब्लौग बनाने की प्रेरणा दी थी.. ध्रुव कि अगली कामिक्स मैंने मारा ध्रुव को और हत्यारा कौन मैं अगले पोस्ट में लेकर आता हूं..
धन्यवाद..
ध्रुव कि कौन सी कामिक्स आप पढना चाहते हैं नामक पोल का अंततः वोट देने का समय ख़त्म हुआ.. कुल जमा २८ वोट पड़े.. आप इस चित्र में पढ़ सकते हैं कि किस कामिक्स को सबसे ज्यादा वोट मिले.. अगर इन पांचों कामिक्स को नए और पुराने ढर्रों में बांटा जाये तो पुराने कामिक्स पूर्ण बहुमत से यह चुनाव जीत गए हैं.. हो भी क्यों ना? किस्सागोई में ध्रुव के पुराने कामिक्स किसी भी हालत में नए कामिक्स से बीस ही आते हैं.. सबसे ज्यादा 13 वोट किरीगी का कहर को मिला है.. जिसे आज मैं आपके सामने लेकर आ रहा हूँ..

मेरे घर में कहानी कि किताबें खरीदना मना तो नहीं था मगर कामिक्स पर सख्त पाबंदी थी.. हमारे लिये कहानी कि किताबों का मतलब चंपक, नंदन, नन्हे सम्राट और बालहंस हुआ करते थे.. जब कभी वह अपने किसी मित्र के पास जब वह ढ़ेर सारी कामिक्स देखता था तो मैं सोचता था कि जब मैं बड़ा हो जाऊंगा तो ढ़ेर सारी कामिक्स खरीद कर पढ़ूंगा.. ये कुछ-कुछ वैसा ही था जैसा छुटपन में जब किसी चीज को खरीदने से मना किया जाता है तो हम सोचने लगते हैं कि बड़े होकर वह खूब खरीदेंगे और मौज करेंगे.. मानो बड़े होने पर पैसे अपने-आप ही आ जाते हैं..
खैर, और किसी चीज से बचपना भले ही खत्म हो चुका हो मगर कामिक्स को लेकर यह बचपना अभी भी वैसा ही है.. जहां कहीं भी अपने पसंद की कोई कामिक्स दिखती है, बस टूट पड़ता हूं वहां..
किरिगी का कहर सर्वप्रथम मैंने अपने स्कूल में अपने एक मित्र के पास देखी थी और जब उससे पढ़ने को मांगा तो उसका कहना था कि पहले कोई और डाईजेस्ट कामिक्स या फिर पतली वाली दो कामिक्स लाकर दो फिर मैं यह पढ़ने के लिये दूंगा.. उस समय मेरे पास चाचा चौधरी कि एक कामिक्स और एक नटवरलाल कि कामिक्स थी.. मैंने उसे हामी तो भर दी मगर जिस दिन कामिक्स लाना तय हुआ था उस दिन मैं किसी कारण से नहीं ला सका, मगर वह लड़का अपनी कामिक्स लाना नहीं भूला था.. संयोग से उस दिन किसी बच्चे के पास से एक कामिक्स निकल आयी और फिर पूरे क्लास कि तलाशी शुरू हो गई.. इस तलाशी में उसकी किरिगी का कहर भी पकड़ा गया.. फिर क्या था, ये कामिक्स भी गई हाथ से.. मगर मैंने उसे धोखा नहीं दिया, और मुझे भले ही वो कामिक्स पढ़ने को नहीं मिली मगर मैंने उसे अपनी वो दोनों कामिक्स पढ़ने को दे दी.. :)
इस घटना के लगभग 4-5 साल के बाद जब मैं सपरिवार पटना शिफ्ट हो गया तब मेरे मकान मालिक के बेटे के पास यह कामिक्स थी और मुझे तब यह पढ़ने को मिला..

किरीगी का कहर एक ऐसी कामिक्स है जिसमें कुछ पौराणिक कथानायकों कि किस्सागोई भी मिलेगी और साथ ही साथ कुछ नये वैज्ञानिक तथ्य भी समायोजित हैं.. इस कामिक्स में ध्रुव के कई महानायक एक साथ दिखे हैं, जैसे किरीगी, जिंगालू और धनंजय.. साथ में राक्षसराज चंडकाल को पहली बार इसी कामिक्स में लाया गया था.. ऐक्सन से भरपूर यह एक ऐसी कामिक्स है जिसे मैं ध्रुव के कहानियों के पतन के लिये भी जिम्मेवार मानता हूं.. क्योंकि यह ध्रुव की पहली डाईजेस्ट कामिक्स थी जिसमे वैज्ञानिक तथ्यों से परे हटकर जादू-मंतर और टोने-टोटकों का सहारा लिया गया था.. वैसे इससे पहले ध्रुव कि वू-डू भी आ चुकी थी जिसमें जादू-टोना दिखाया गया था, मगर वह कहीं से भी अविश्वनीय नहीं लगा था..
अब आगे कि कहानी जानने के लिये आप खुद ही पढ़ लें किरिगी का कहर..
कामिक्स डाऊनलोड का लिंक
इस कामिक्स को डाऊनलोड करने के लिये आप फोटो पर भी क्लिक कर सकते हैं..
संजय गुप्ता जी के अनुरोध पर डाउनलोड लिंक हटाया जा रहा है..

यहाँ इस चिठ्ठे पर मेरी पहली पोस्ट है। ध्रुव मेरा सबसे पसंदीदा कौमिक हीरो है,पर आज मैं अपने उन पसंदीदा विलेनों की चर्चा करूँगा जिनका सामना ध्रुव से हुआ। ये वो किरदार है जिन्होने बार बार मुझे दीवाना बनाया है :
1. महामानव- महामानव की पहली कौमिक पढ़ने से पहले मैं इसके एक-दो और कौमिक पढ़ चुका था।ये मुझे हमेश से प्रिय था पर जब 'महामानव' पढ़ी,तब से ये मुझे राज कौमिक्स द्वारा निर्मित सबसे ज़ोरदार विलेन लगने लगा।मुझे याद है की इस कौमिक में डायनासौर के मरने की वजह पढ़के मैने राज कौमिक्स की रचनात्मकता की बहुत सराहना की थी। जलजला मे जब महामानव के किरदार को बड़ा महत्व मिला,तो इससे भी मुझे बहुत खुशी हुई। मानसिक शक्तियों से युक्त महामानव मेरे लिये सबसे खास विलेन है ।

2. क्विज़ मास्टर और विदूशक- 'क्विज़मास्टर' और 'दुश्मन' मैने लगभग एक ही समय पढ़ी थी। दुश्मन कई साल पहले मैने कहीं खो दी थी,पर क्विज़मास्टर को मैं शायद हज़ार बार पढ़ चुका हू। 'मुझे मौत चाहिये' के बाद ये मेरी पसंदीदा कौमिक्स है। 'एवर-रेस्ट','आ-हट','चट्टान' जैसे जवाबो को मैं कभी भूल नही सकता,उसी तरह इसका एक डायलौग कि 'अंधेरे के बाद और और अंधेरा आता है' मेरे लिये बहुत यादगार है।
इसी प्रकार विदूशक का किरदार भी बहुत मस्त था। जब विदूशक कहता है"बताओ मेरे पीछे भिखमंगे की तरह क्यों लगे हो",वो शायद मेरे कौमिक जीवन का शायद सबसे मज़ेदार पल है। विदूशक जितना जीवंत बहुत कम किरदार लगा है मुझे। अफ़सोस की बात है की ये दोनो सिर्फ़ एक-एक कौमिक्स में आये.गौरतलब है की ये बैटमैन के 'जोकर' और 'रिडलर' पर आधारित पात्र है,शायद ये एक वजह हो कि राज कौमिक्स ने इनका अधिक उपयोग नही किया।

3. नक्षत्र- बिल्कुल ध्रुव जैसा एक पात्र रचा गया और इसकी 'जंग' ध्रुव से हुई। नक्षत्र भी अब तक सिर्फ़ एक कौमिक्स में आया है,जो की ध्रुव की बेहतरीन कौमिको मे एक है। मुझे अब तक नक्षत्र के जेल से बाहर आने का इंतज़ार है ।
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4. बौना वामन- खूनी खिलौने से ही इसने मेरे दिल मे एक जगह बना ली थी। पर बौना वामन ने एक 'स्पेशल अपीयरेंस' मे शायद सबसे अधिक मज़ा दिया। कौमिक "मैने मारा ध्रुव को" मे वह बायोट्रोन को जिस प्रकार अपनी कहानी सुनाता है,मज़ा आ गया था,आखिर बौना वामन एक ना एक ट्रिक बचाकर रखता है ।

5. डौक्टर वायरस- डौक्टर वायरस मुझे काफ़ी रीयलिस्टिक विलेन लगा है हमेशा से। काफ़ी हद तक ये शक्तिमान के डौक्टर जैकाल की याद दिलाता है। वायरस के प्लान हमेशा बहुत खतरनाक रहे है और मुझे उम्मीद है की भविष्य मे फ़िर इसे किसी ज़ोरदार कौमिक मे देखने का मौका मिले। शायद अलकेमिस्ट और डौक्टर वायरस को कभी साथ लाया जाये ।
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6. अन्य विलेन- ग्रैंड मास्टर रोबो एक बहुत अहम विलेन रहा है और इसे काफ़ी महत्व भी दिया है राज कौमिक वालो ने। अगर कभी ध्रुव पर फ़िल्म बने तो मुझे पूरी उम्मीद है कि उसमे रोबो की भूमिका अहम होगी। ध्वनिराज और चुंबा को विज्ञान के सिद्धांतों पर आधारित करके बनाया गया है। चुंबा की हाल की कौमिक्स मैने नही पढ़ी है पर इससे पहले तक मेरा ये मानना है कि चुंबा का प्रयोग राज कौमिक्स ने भरपूर नही किया है ।

तो ये थे वो मुख्य विलेन जिन्होने ध्रुव के साथ मेरी कौमिक यात्रा को बेहद सुखद बनाया है। उम्मीद है की आप लोगो की भी यादें ताज़ा हुई होंगी ।
ये कहानी है कुछ ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों कि जो पद और पैसे के लालच में कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं और बन जाते हैं रोमण हत्यारा..
ये कामिक्स सुपर कमांडो ध्रुव के शुरूवाती दिनों के कामिक्स में से आती है.. शायद ध्रुव की दूसरी कामिक्स.. उन दिनों कामिक्स बाजार में इंद्रजाल कामिक्स, मनोज कामिक्स, डायमंड कामिक्स और तुलसी कामिक्स चला करते थे.. राज कामिक्स भी बाजार में अपनी पहचान नागराज के कामिक्स के द्वारा बना रहे थे.. ऐसे समय में राज कामिक्स ने ध्रुव नाम के एक नये कैरेक्टर को जन्म दिया और धीरे-धीरे पूरे बाजार पर छा गये.. अगर आज विशुद्ध भारतीय कामिक्स सुपर हीरोज की बात की जाये तो ध्रुव और नागराज ही सबसे पहले दिमाग में आते हैं.. मनीष गुप्ता जी और संजय गुप्ता जी को मैं तहेदिल से धन्यवाद देना चाहूंगा ऐसे चरित्रों का निर्माण करने के लिये.. आज भारतीय बाजार से मनोज कामिक्स, इंद्रजाल कामिक्स और तुलसी कामिक्स पूरी तरह से बंद हो चुके हैं(मेरी जानकारी मे, अगर मैं गलत हूं तो सही करें)..
मेरी नजर में शुरूवाती दिनों में आने वाली ध्रुव के कामिक्स कि बात ही कुछ और हुआ करती थी.. स्टोरी लाईन बिलकुल कसी हुई.. कहानी में तेजी और कुछ भी ऐसा नहीं जिसे आप यह कह सकें कि ये संभव नहीं है या फिर यह कि ये बस कहानियों या कामिक्स में ही हो सकते हैं.. आजकल उसके आने वाले कामिक्सो में वह बात नहीं रही.. मगर फिर भी मैं उम्मीद करता हूं कि वो स्वर्णिम दिन फिर से लौट कर आयेंगे..
आप फिलहाल यह कामिक्स पढें.. मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि ये आपको जबरदस्त लगेगी..
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हर सुपर हीरो का अपना एक सुनिश्चित सुपर विलेन भी होता है.. जैसे स्पाईडर मैन का ग्रीन गॉबलिन.. बैटमैन का जोकर.. कुछ ऐसा ही ध्रुव के भी कुछ सुपर विलेन सुनिश्चित हैं.. और इनमें प्रमुख हैं ग्रैंड मास्टर रोबो, चुम्बा, बौना वामन इत्यादी..
आज मैं आपके सामने लेकर आया हूं ग्रैंड मास्टर रोबो वाली ध्रुव की पहली कॉमिक.. ये एक फुल एक्सन पैड कामिक है.. बस लगातार पढते जाईये, ज्यादा सोचने का मौका नहीं मिलेगा.. एक के बाद एक लगातार नये एक्सन सीन बनते जायेंगे.. इस कॉमिक्स में ध्रुव के एक नये मित्र से भी परिचय कराया गया था, जो अभी तक उसकी कॉमिक्सों में आता है.. जब कभी भी ध्रुव मुसीबत में होता है तब उसका ये मित्र उसकी सहायता करने जरूर पहूंचता है.. इसका नाम धनंजय है.. अब यदी सारा कुछ मैं यहीं बता दूंगा तो आप क्या पढेंगे? सो बेहतर है की आप इस कॉमिक्स का मजा उठायें.. :)
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इसके लेखकों और चित्र बनाने वाले कलाकारों की जानकारी मुझे नहीं है.. अगर आपको हो तो मुझे जरूर बताईयेगा..
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आज बहुत दिनों के बाद थोड़े चैन और सकून के साथ बैठा नेट से खेल रहा था तो सोचा क्यों ना आप सभी को अपनी मनपसंद कामिकों में से एक पढा दूं.. ये कामिक सुपर कमांडो ध्रुव की तीसरी कामिक्स थी, जिसमें कल्पनाओं की उड़ान काफी ऊंची भरी गई थी.. एक जर्मन वैज्ञानिक कैसे अपने आविष्कार को पूरा करके आत्महत्या कर लेता है और फिर उसके 50 सालों के बाद वो गलत हाथों में चला जाता है..

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वैसे ये कामिक्स दो भागों में बंटा हुआ है जिसके लिये आपको इंतजार करना परेगा.. आज रात तक का.. मैं उसे आज रात सोने से पहले पोस्ट करता जाऊंगा.. :)
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हर पीढी का अपना एक नायक होता है.. जैसे मुझसे 10-15 साल पहले वाली पीढी के लोगों के लिये वेताल और मैंड्रेक नायक हुआ करते थे.. उस समय भारत में इंद्रजाल कामिक्स का प्रभुत्व हुआ करता था.. सो उस पीढी के नायक भी उसी प्रकाशन से छपने वाली कामिक्स की हुआ करती थी.. ठीक वैसे ही मेरी पीढी के लिये नायक ध्रुव और नागराज जैसे हीरोज हैं.. जब पढना अच्छे से सीख गया था उसी समय ये सभी नायक राज कामिक्स नामक प्रकाशन से छपना शुरू हुये थे जो अभी तक प्रकाशित हो रहे हैं..

आज मैं आपके सामने लेकर आया हूं सुपर कमांडो ध्रुव की पहली कामिक्स "प्रतिशोध की ज्वाला" इस कामिक्स में बताया गया है कि कैसे एक लड़का सर्कस के कलाबाजी दिखाते दिखाते क्राईम फाईटर बना जिसके भीतर कुछ असाधारण गुण थे.. इसकी पहली कामिक्स में बस एक चरित्र निर्माण जैसी बाते ही की गई हैं मगर जब मैं आपके सामने एक एक करके इसकी कामिक्स लेकर आऊंगा तब मेरा दावा है कि आप सभी इसके दिवाने हो जायेंगे.. आप इसे पढें और अपनी राय दें की कैसी लगी आपको मेरी पहली पोस्ट की हुई कामिक्स?
Download Link : प्रतिशोध की ज्वाला
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