हिंदी एस्ट्रिक्स MINT में

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यदि  आपको याद हो तो इसी ब्लॉग पर मैंने एक पोस्ट डाली थी Asterix के भारतीय संस्करण के विषय में. हाल ही में Mint ने Asterix की पचासवीं वर्षगाँठ पर एक story करने का निर्णय किया तो उनके रिपोर्टर कृष ने मुझसे हिंदी एस्ट्रिक्स पर एक लम्बी चर्चा की, मैंने उनका सीधा संपर्क हरीश एम् सूदन जी से भी करवाया जिन्होंने सभी छः हिंदी एस्ट्रिक्स का सुलेखन किया और चार का बेहतरीन अनुवाद भी. उनके द्वारा अनुवादित एस्ट्रिक्स में ये पकड़ना असंभव है कि अनुवाद कहाँ ख़त्म हुआ और सूदन साहब की लेखनी कहाँ शुरू हुयी.
बहरहाल पेश- ए -खिदमत है MINT में आज प्रकाशित उस Story का वह अंश जहां हिंदी एस्ट्रिक्स की चर्चा हुयी है और कहीं कहीं उसमें हमें भी Quote किया गया है... पूरी Story के लिए क्लिक करें यहाँ.


चित्रकथा : कॉमिक्स को समर्पित एक अनूठा प्रयास

Aabid Surti (Lekhak : Bahadur, Shooja ityadi) ke saath Chitrakatha Project
चित्रकथा याने भारतीय कॉमिक्स। चित्रकथा याने चित्रों के माध्यम से कथा कहने का प्रयास । चित्रकथा याने बचपन की वे रंगबिरंगी पुस्तकें जिनमें खो जाने के बाद समय और स्थान (अंग्रेज़ी मे कहें तो space-time) का भान ही नहीं रह जाता। जहाँ कुछ उन पुस्तकों को भारी पढाई की पुस्तकों के बीच भूल कर आगे बढ़ गए वहीँ कुछ उनके इस मायाजाल में सदा इस तरह फंसे रहे कि उनके लिए शायद ये दुनिया और उनके अंतर्मन के बीच संबोधन का जरिया बन गई। मैं दूसरे किस्म के लोगों में हूँ, और यह देख कर बड़ा अच्छा लगता है कि इस प्रजाति के लोगों की कमी नहीं है, और जो इस प्रजाति के लोग हैं वे इस तरह के कई ब्लोग्स या चर्चाओं में बचपन की इन पुस्तकों की यादें उन तक भी ले जाते हैं जिनके मन के किसी कोने में वो बचपन अब भी छिपा है और एक मुस्कान मात्र से कॉमिक्स भाईचारे के रिश्ते में सभी बंध जाते हैं। बचपन का मोहक इंद्रजाल है ही कुछ ऐसा...

ऐसे में हमारे मन में विचार आया कि जहाँ आज भी इन पुस्तकों के इतने प्रसंशक मौजूद हैं और इन पुस्तकों की इतनी मांग है ब्लोग्स पर और ऑनलाइन फोरम्स पर क्या हम सच में इनके रचयिता इनके लेखकों और कलाकारों को सही तरीके से पहचानते हैं। इक्का दुक्का लोगों को नाम याद होंगे पर क्या इन पन्नों के पीछे की वे कहानियाँ पता हैं जिनमें छुपी है बरसों की मेहनत, कड़ा संघर्ष और कला के इस उपेक्षित माध्यम के साथ एक ममत्व भरा लगाव? इस विचार को और बल मिला लोगों की आपस में की जाने वाली बातों से जहाँ लोग बड़े चाव से आर्टिस्ट्स के बारे में बात करके एक दूसरे से जानना चाहते तो थे पर इसे कॉमिक्स जगत की विडम्बना कह लीजिये या दुर्भाग्य देश में कभी इस कला के इतिहास पर कोई प्रमाणिक पुस्तक या तथ्यपरक लेख कभी देखने को नहीं मिले...हमने आज से करीब पाँच वर्ष पूर्व इस विचार के साथ एक रिसर्च शुरू की और देश के कोने कोने में छिपे इन आर्टिस्ट्स को ढूंढ निकाला...जिनमें से आधे बुजुर्ग अब रिटायर्ड जीवन बिता रहे हैं...उनसे मिल कर उन्हें साक्षात्कारों के लिए मनाया (जो शायद इस सफर का सबसे दुस्कर कार्य था) चुन चुन कर उनके पुराने काम इकट्ठे किए, कहानियों के सूत्र जोड़े और इस तरह शुरू हुआ वह सफर जिसे आज हम चित्रकथा के नाम से पुकार रहे हैं।
चित्रकथा डॉक्युमेंटरी फ़िल्म समर्पित है उन महान कलाकारों को जिन्होंने जन्म दिया उन कॉमिक्स चरित्रों को जो आज भी भारतीय जनमानस की स्मृतियों में ताजे हैं पर वे ख़ुद जीते रहे एक गुमनामी भरा जीवन। हमारा प्रयास है कि कॉमिक्स फैन्स को आख़िर वो चेहरे देखने को मिलें जिन्होंने रचा था ये सारा मायाजाल कॉमिक्स का और गढे थे वे पात्र जिनकी स्मृति मात्र से बचपन कि सोंधी खुशबु आने लगती है। इस डॉक्युमेंटरी फ़िल्म में शामिल हैं आपके सभी प्रिय कलाकारों की वे कहानियाँ जिनमें आपको मिलेंगे अपने उन सारे सवालों के जवाब जो ये सारी कॉमिक्स पढ़ते समय आपके मन में उठा करते थे... चाचा चौधरी की प्रेरणा प्राण साहब को कहाँ से मिली? बहादुर का कार्यक्षेत्र चम्बल क्यों है? नागराज की कहानियों में बदलाव क्यों आए? राज कॉमिक्स किस तरह शुरू हुयी? मधुमुस्कान के किरदार मालिक साब की रचना कैसे हुयी...और भी ना जाने क्या क्या?

आप इस प्रोजेक्ट के विषय में और भारतीय कॉमिक्स के विषय में ढेर सारी जानकारियाँ पा सकते हैं हमारी डॉक्युमेंटरी के फेसबुक पेज पर जा कर, उसके लिए क्लिक करें यहाँ


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क्या आप तैयार हैं मिकी वोल्वी या स्पाईडर मिकी के लिए : डिस्नी ने खरीदा मार्वेल

डेक्सटर की कहानी के बीच में रुकावट के लिए खेद है।

पर
ख़बर ही कुछ ऐसी है कि मुझे कहानी के बीच मे ना चाहते हुए भी टपकना पड़ा। मैं आज दोपहर डिस्नी इंडिया के ऑफिस में बैठा हुआ अपने पुराने सहकर्मियों के साथ बातें ही कर रहा था कि इस बड़ी ख़बर की उद्घोषणा हुयी डिस्नी ने मार्वेल कॉमिक्स को टेकओवर कर लिया है, वह भी पूरे चार बिलियन अमेरिकन डॉलर्स में। याने पता नहीं कब आपको मिकी माउस की कहानी में स्पाईडी की झलक मिल जाए या किसी फ़िल्म में डोनाल्ड डक और हॉवर्ड डक गलबहियां डाले घूमते नज़र आयें।

मजाक दरकिनार रखते हुए मैं बताना चाहूँगा कि एक कंपनी के तौर पर डिस्नी ने इससे पहले भी कई ऐसे टेकओवर्स किए हैं जिन्हें देख कर लोगो ने दाँतों तले उंगलियाँ दबा ली थी। यदि मैं आपसे कहूँ डिस्नी ने क्विनटीन टेरेंटिनो की सभी फिल्में जैसे कि पल्प फिक्शन इत्यादि का निर्माण किया है या कहूं कि कई अडल्ट शोज़ जैसे डेस्परेट हाउसवायिव्ज़, lost या Ugly Betty इत्यादि भी डिस्नी द्वारा निर्मित हैं तो क्या आप यकीन करेंगे? जी हाँ यह बिल्कुल सच है क्योंकि डिस्नी ने मनोरंजन के किसी भी रूप को नई दिशा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी और यही कारण है कि कई बड़ी कंपनियाँ जैसे कि Touchstone, MIRAMAX या abc, espn इत्यादि डिस्नी के अर्न्तगत आने वाली कई कम्पनियों में से कुछ एक हैं। डिस्नी को सिर्फ़ एनीमेशन या बच्चों के लिए बनने वाले कार्यक्रमों वाली कंपनी समझने की भूल हम सब करते हैं पर डिस्नी दरअसल जैसी दिखती है उससे कहीं ज़्यादा विस्तृत कंपनी है। और इस अति विस्तृत कंपनी का हिस्सा बन कर मार्वेल कॉमिक्स अब कैसी ऊँचाइयाँ छुयेगी ये तो आनेवाला समय ही बताएगा पर फिलहाल इस ख़बर से मीडिया जगत के बड़े बड़े दिग्गजों की नींदें उड़ गई हैं।
विस्तृत समाचार के लिए इन लिंक्स पर जाएँ :
Hollywood Reporter
Comic Book Resources

डेक्सटर की रहस्यमयी दुनिया---डेक्सटर्स लैबोरेटरी

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रात का समय.. घनघोर अंधेरा.. डेक्सटर अपने बिस्तर पर बैठा डर से कांप रहा है.. खिड़की के बाहर बिजलियां कड़क रही है.. किसी अनहोनी की आशंका से डेक्सटर का जी घबराया हुआ है.. वह थोड़ी देर पहले हुई उस भयानक घटना के बारे में सोच रहा था जो उसके और उसकी बड़ी बहन डीडी के साथ घटा था..

उसके घर की गोल्ड फिश कैसे पानी में ही तड़प-तड़प कर मर गई थी.. उसे जहां तक पता था उसके मुताबिक मछली को पानी से बाहर निकालने पर ही मरती है, क्योंकि वह पानी के बाहर सांस नहीं ले पाती है.. मगर यह तो पानी के अंदर ही मर गई.. ऐसा कैसे संभव है? जरूर इसके पीछे भी विज्ञान का ही कोई सिद्धांत काम कर रहा होगा जिसके बारे में किसी को पता नहीं.. और अगर वह इसकी खोज करता है तो संभव है कि उसे नोबल पुरस्कार भी मिल ही जाये..

आईये, आगे जानने से पहले मैं अपना और अपनी बुद्धु बहन डीडी का परिचय दे देता हूं..

मैं डेक्सटर छः साल का एक बच्चा हूं जिसका दिमाग किसी वैज्ञानिक से कम नहीं है और मैं हमेशा अपनी सीक्रेट लैबोरेटरी में ही काम करता रहता हूं.. मैंने यह लैब अपने घर के नीचे बना रखा है जिसके बारे में मेरे घर में मेरे अलावा सिर्फ डीडी को ही पता है.. और वह बुद्धु डीडी हमेशा यहां आकर मेरा समय बरबाद करती रहती है..


डीडी!! हां, यही नाम है उस बुद्धु लड़की का जो मेरी बहन भी है वो आठ साल की है.. उसे कुछ नहीं आता है.. वो हमेशा मेरे लैब में घुसकर मुझे परेशान करती रहती है.. जितना स्कूल में पढ़ाई होती है बस उतना ही पढ़ती है, और बाकी समय वह बस खेल-कूद, नाच-गाने में ही लगी रहती है..


हां तो मैं फिर आता हूं अपने उस गोल्ड फिश की कहानी पर.. यूं तो मैं हमेशा साईंस के बारे में ही सोचता हूं और कहानियों की बाते नहीं करता हूं, मगर क्या करूं वह रात थी ही अजीब.. कल रात जब हमारे गोल्ड फिश की मौत हुई तो मैं और डीडी बहुत दुखी हुये.. हमारे मम्मी-डैडी भी बहुत दुखी थे.. खैर रात हो चुकी थी और वे दोनों सोने चले गये थे.. उनके जाने से पहले मैंने उनसे पूछा कि इस गोल्ड फिश की लाश का क्या किया जाये? डैडी ने कहा, "कुछ नहीं डेक्सटर, बस इसे फ्लश कर दो..

मैंने मछली को उठाया और रेस्टरूम की ओर बढ़ चला.. मैंने देखा डीडी भी मेरे पीछे-पीछे चली आ रही थी.. उसे भी मछली के मरने का बहुत दुख हुआ था..

क्रमशः...