Saturday 3 March 2012

84 Tears (भोपाल गैस काण्ड और सिख विरोधी दंगे, 1984 पर आधारित काव्य कॉमिक)



जैसा की मैंने यहाँ बताया था की मै एक काव्य कॉमिक लिख रहा था, जो हाल ही मे प्रकाशित हुई. आर्टिस्ट रवि शंकर  के बनाये दृश्य अदभुत है. पहले तो मैंने उसका दाम रखा पर मेरा मन नहीं माना. मुझे लगा कई सामाजिक संदेश देती किताब, अनमोल है और वो अधिक से अधिक लोगो तक पहुँचनी चाहिए इसलिए मैं  84 Tears को ऑनलाइन मुफ्त प्रकाशित कर रहा हूँ. अभी ये Pothi Networks aur Myebook पर उपलब्ध है. जल्द ही कुछ और ऑनलाइन चेनल्स पर  प्रकाशित करूँगा.



निम्न वेब-लिंकस पर आपको मुफ्त पढने और करने को मिलेगी. अगर ये प्रयास अच्छा लगे या 84 Tears आपके दिल को छुए तो इसको ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुँचाने मे मदद कीजिये.



मै आगे ऐसे और प्रयास करता रहूँगा. आप लोगो के प्रोत्साहन और मार्गदर्शन की ज़रुरत है. मेरे रचनात्मक काम, किताबे, प्रकाशित लेखो, आदि के लिये फेसबुक पर यह पेज है. -

http://www.facebook.com/Mohitness

- Mohit Sharma (Trendy Baba / Trendster) 

Wednesday 30 November 2011

काव्य कॉमिक

कॉमिक्स की विशेषता यह होती है की वो कला के दो माध्यमो (चित्रकला और कहानी) का संगम होती है और पाठक को दोनों का रस देती है. एक छुटभईये लेखक और कवी होने की वजह से मेरे मन के किसी कोने मे कविता और चित्रों के मेल की बात उठी जो मैंने कहीं पढ़ा नहीं. पर अपने अनुभव से बता रहा हूँ और मुझे पक्का पता है की दुनिया इतनी विशाल है की ऐसे प्रयास भी पहले हो चुके होंगे. कभी-कभी किसी कहानी की परिकल्पना मैंने अपने मन मे सहेज रखी होती है, पता चलता है की वो किसी फिल्म, नाटक, किताब मे पहले ही दिखाई जा चुकी है.

यहाँ मैंने एक प्रतिभावान कलाकार (जिनका नाम आपको कॉमिक्स आने पर ही
पता चलेगा) के साथ मिलकर एक 'काव्य कॉमिक' बनायीं है जो सन 1984 मे घटी दो दुखद घटनाओ भोपाल गैस काण्ड और सिख विरोधी दंगो के दर्द को कल्पना मे पिरो रही है. थोडा काम अभी बचा है. इस काव्य कॉमिक से 3 दृश्य यहाँ बाँट रहा हूँ. बहुत कम होता है की मेरा मन किसी काम मे लगता है. आशीर्वाद दीजियेगा. 





Sunday 27 November 2011

पौराणिक वर्गीकरण


(Virgin Comics/Liquid Comics: 2006-2007)

भारतीय कॉमिक्स परिदृश्य मे उभरे एक नए विषय पर लिख रहा हूँ. चीज़ों, बातों, जगहों, व्यक्तियों, आदि का वर्गीकरण करना एक बड़ी समस्या है. मैंने गिनती करना छोड़ दिया है जब मैंने किसी व्यक्ति को असल जीवन मे या इंटरनेट पर गलत वर्गीकरण करने पर समझाया हो. यह एक छदम सामाजिक बुराई है जिसपर कम ही का ध्यान जाता है, विडंबना तो यह है की वर्गीकरण हर जगह है.

खैर, मै यह सब इसलिए बोल रहा हूँ की वर्गीकरण हमे कॉमिक्स मे देखने को मिलता है. इस बार मै बाहरी दुनिया (और बाहर का अनुसरण करते कई भारतियों) की भारत के बारे मे धारणा पर आपका ध्यान लाना चाहूँगा. हाल के वर्षो मे भारतीय कलाकारों की माँग दुनिया भर के कॉमिक्स प्रकाशनों मे बढ़ी है. कारण वही पुराना है की यहाँ के फनकार बाहरी कलाकारों की तुलना मे कम दाम पर उसी गुणवक्ता का काम देते है. बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली, आदि बड़े शेहरो से आउटसोर्स होकर वो कला दुनिया भर मे सराही जाती है. अब विश्व के प्रमुख प्रकाशन भारत मे कई जगह उपलब्ध है, जहाँ नहीं है वहां अपडेट और ज्ञान देता इंटरनेट है. साथ ही भारत मे बच्चो और युवा वर्ग के लिए कुछ नये भारतीय कॉमिक प्रकाशक भी आये है जिनकी कॉमिक्स मुख्यतः इंग्लिश मे होती है.

तो मुद्दे की बात ये है की मैंने ऐसे कई भारतीय कलाकारों की कॉमिक्स और नये भारतीय प्रकाशकों (मै नाम नहीं ले रहा हूँ) की कॉमिक्स पढ़ी. उनमे से अधिकतर मे मैंने एक बात देखी की उनमे वो कॉमिक सीरिज़ पौराणिक कथाओं, ग्रंथों, देव गाथाओं, पर आधारित या उनसे मिलते-जुलते परिवेश की काल्पनिक कहानियाँ थी. इतनी सारी कॉमिक्स मे यही बेकड्रॉप, थीम पढ़ कर मन मे सवाल उठा क्या बस यही है भारत? तरह-तरह के लोगो, जगहों, धर्मो, भाषाओँ, वन्य जीवन, विरासतों, किवदंतियों, प्रदेशों, संस्कृतियों और उनके विशाल इतिहास से मिलकर बना भारत? मन ने तुरंत ही जवाब भी दिया, "नहीं!"

भारत मे बहुत कुछ और भी है या था, जो दुनिया भर को और उसकी युवा पीढ़ी को काल्पनिक परिवेश मे लपेट कर दिखाया जा सकता है. जैसे पूर्वोतर भारत के राज्यों की अनगिनत किवदंतियां को बाहरी दुनिया तो क्या उन प्रदेशो के अलावा दूसरे भारतीय राज्यों तक मे लगभग अनसुनी है या जनजातियों की कुछ अचरच मे डाल देने वाली प्रथाएं और उनके पीछे के कारण. पिछले दशको के इतिहास की घटनाओ (जैसे गोधरा काण्ड, मुंबई बम विस्फोट, 1984 मे घटे सिख विरोधी दंगे और भोपाल गैस काण्ड, आदि) को बेस बनाकर उनपर कुछ काल्पनिक कहानियाँ जो न सिर्फ लोगो संदेश दे बल्कि नयी पीढ़ियों को बताये की भारत मे ऐसा भी हुआ था. पर दुर्भाग्यवश ऐसे विषयों पर प्रकाशकों का ध्यान न के बराबर ही जाता है.

अगर कोई कहे की ऐसा संभव नहीं है या अगर ऐसा किया जायेगा तो पाठको को आनंद नहीं आएगा. तो मै यही कहूँगा की कुशल लेखनी मे सब संभव है. मै भी अपने सीमित संसाधनों से ऐसा ही प्रयास कर रहा हूँ अगर सफल हुआ तो आप सबके साथ सबसे पहले बाँटूगा. वैसे आप इस वर्गीकरण के बारे मे क्या सोचते है?