Showing posts with label Nagraj. Show all posts
Showing posts with label Nagraj. Show all posts

Friday, March 30, 2018

मैं हैरान था, गिज्मो डक जस्टिस लीग में क्यों नहीं?

शुरुवात करते हैं राज कामिक्स से.. निःसंदेह नागराज और ध्रुव सालों से राज कामिक्स का चेहरा रहे हैं. उसके बाकी चर्चित किरदार, जैसे डोगा परमाणु भोकाल उस चेहरे के पीछे छिपे रहते हैं. अब मसला जब भी नागराज और ध्रुव के बीच अटकता है तो सामान्तः ध्रुव नागराज पर भारी पड़ता है, मगर अगर मसला किसी खलनायक के विरुद्ध जाता है तो लगभग हर जगह नागराज ही नागराज छाया रहता है.. इन बातों से शुरुवात करने का कारण आपको आखिर में मिलेगा.

अब आते हैं जस्टिस लीग पर. हमारी पीढ़ी के वे लोग जो कार्टून के दीवाने रहे हैं वो अब भी उन दिनों को कभी ना कभी जरुर याद करते हैं जब शाम ढले DD Metro पर कार्टून्स आते थे और हम सभी बेसब्री से अपने फेवरेट कार्टून का इन्तजार किया करते थे.. चंद मेरे जैसे लोग भी थे जो लगभग हर कार्टून उतनी ही श्रद्धा से देखते थे.. चाहे बैटमैन हो या सुपरमैन या जस्टिस लीग या ममीज अलाइव या स्पाइडरमैन या एक्समैन या फिर कोई और? और हमारे लिए जस्टिस लीग का मतलब वे किरदार हुआ करते थे जिन्होंने इसकी शुरुवात की थी.. सुपरमैन, बैटमैन, वंडर वुमन, हॉक गर्ल, मार्सियन, फ्लैश और ग्रीन लैटर्न. क्या मैंने साईबोर्ग या एक्वामैन का नाम लिया? नहीं ना! क्यों नहीं लिया? क्योंकि वे इसके पार्ट थे ही नहीं..मैंने इनकी शुरुवाती कामिक्स नहीं पढ़ी, क्योंकि उस समय उन कामिक्स तक पहुँच भी नहीं थी और जो गर पहुंच होती भी तो मेरी जेब की पहुंच से बाहर होती.. मेरी समझ कार्टून देख कर ही बनी.. एक्वामैन का जिक्र जस्टिस लीग कार्टून के चौथे और पांचवे एपिसोड में हुई और वह आगे भी समय-समय पर दिखता रहा, मगर उसे जस्टिस लीग का पार्ट नहीं कह सकते हैं.. और बात साईबोर्ग की तो वह पहले सीजन के ख़त्म होने के बाद कभी दिखा होगा(जी हाँ, दुसरे सीजन से इतने सारे सुपरहीरो का जमघट लगा की तीन-चार किरदार को छोड़ और कोई याद ही नहीं। जैसे ग्रीन एरो, ब्लैक कैनरी, सजाम, इत्यादि).. वह भी तब जब हॉक गर्ल इसका हिस्सा बनने से इनकार कर दी(क्यों, वह एक अलग कहानी है, फिर कभी).
सिनेमा में बैटमैन ने इस लीग की शुरुवात की, जबकि कार्टून में बैटमैन इसका हिस्सा बनने से इनकार कर दिया था, क्योंकि बैटमैन ऑलवेज वर्क्स अलोन!

जब कुछ भी दिखाना था तो अपने अंकल स्क्रूच का गिज्मो डक क्या बुरा था, उसे भी हिस्सा बना ही लेते. वह तो फ्लैश से भी बेहतर कामेडी कर लेता है!

सिनेमा में सब कुछ सलीके से चल रहा था, मगर सिर्फ तब तक जब तक की सुपरमैन कि इंट्री नहीं हुई..मैंने किसी कामिक्स या कार्टून में सुपरमैन को यह कहते सुना हूँ की उसे किसी से हारने का डर है तो वह वंडर वुमन और मार्सियन से है. मगर सिनेमा में वंडर वुमन उसके सामने कुछ भी नहीं..कार्टून के किसी एपिसोड में फ्लैश को इतनी तेज गति से भागते हुए लेक्स को हराते देखा है कि डाइमेंशन का फर्क भी ख़त्म होने लगता है, मगर यहाँ सुपरमैन उसकी गति से भी तेज निकला.. बैटमैन को पता है की सुपरमैन क्रिप्टोनियन या फिर बिजली के तेज झटके या जादू के सामने बेबस है, लेकिन वह बिना तैयारी के उससे भिड जाता है.. यार मजाक बना कर रख दिया है बाकि सुपरहीरो का..(मैं साईबोर्ग और एक्वामैन का जिक्र भी जरुरी नहीं समझता)..

एक अच्छे भले सिनेमा का यह हाल कर डाला इन्होने.. मैं DC के किरदार को दिल से पसंद करता हूँ, मगर सिनेमा मुझे मार्वल का पसंद है.. वजह बताने की जरुरत अभी भी है क्या?

PS - हाँ हाँ, मुझे पता है इसे रिलीज हुए महीनों गुजर चुके हैं। मगर मैंने तो हाल ही में देखा है ना!

Sunday, November 22, 2015

नागराज जन्मोत्सव 2015

Pic Credit - Mr. Vishi Sinha

नागराज जन्मोत्सव 2015 का हिस्सा बना, बुराड़ी, दिल्ली में राज कॉमिक्स के बंद हो चुके एनिमेशन स्टूडियो Rtoonz जो अब पाम गार्डन्स में परिवर्तित हो गया है, वहां के प्रांगण में 15 नवंबर 2015 को राज कॉमिक्स द्वारा भव्य आयोजन किया गया। सजावट, तैयारियां बहुत अच्छी थी पर शायद दिवाली के बाद होने के कारण आने वाले फैंस और कलाकारों, लेखकों की संख्या अपेक्षा से काफी कम रही। पर इसका फायदा यह रहा कि कई कलाकारों, प्रशंषको से तस्सल्ली से बात करने का अवसर मिला जो वैसे अधिक भीड़ में नहीं हो पाता। हनीफ अज़हर जी, हरविंदर मांकड़ जी, फैसल मोहम्मद भाई, अंसार अख्तर जी इनमे प्रमुख थे। बाकी राज कॉमिक्स से जुड़े क्रिएटिव्स संजय जी, मनीष जी, अनुपम जी, हेमंत जी, आदिल जी, ललित शर्मा जी, ललित सिंह जी, मंदार भाई, शादाब भाई, क्षितीश जी आदि सम्मानित सदस्य थे ही।

Vinod Kumar ji
मुझे इवेंट में आने में थोड़ा झिझक थी क्योकि बीच में काफी वज़न बढ़ गया है मेरी लापरवाही से और जो पहली छवि थी मेरी उसको बदलना नहीं चाहता था पर फिर कई मित्रों को आने की बात कह चुका था खासकर देवेन जी को जो ख़ास मुंबई से आ रहे थे यहाँ तो मैंने सोचा कि कहीं जन्मोत्सव के बाद ये सब मुझे पीटने ना आ जाएँ इसलिए मैं भी आ गया। अमित अल्बर्ट और हुसैन ज़ामिन जी से नहीं मिल पाने का मलाल रहा। स्टेज पर हो रहे मनोरंजन के साथ-साथ आर सी फ़ोरम्स से लेकर इंडियन कॉमिक्स गैलेक्सी के नए-पुराने मित्रों से बातों का दौर चलता रहा। फिर रात को रूककर विशाल, देवेन भाई, मैड्डी, नरेंद्र भाई, शादाब भाई, जॉन रॉक और इंडियन कॉमिक्स गैलेक्सी के सदस्यों से गप्पे चले। अगली सुबह पहले से काफी बदल चुके राज कॉमिक्स परिसर का भ्रमण किया, पहली बार आये मित्रों ने ऑफिस का अवलोकन किया, बस फिर बुरारी पार कर अगली बार मिलने की बात कर सबसे विदा ली। ओवरआल एक और यादगार इवेंट! 
smile emoticon
अब 29 नवम्बर को दिल्ली में ही अगले इवेंट कॉमिक फैन फेस्ट का इंतज़ार है।
- मोहित शर्मा (ज़हन)

Sunday, September 8, 2013

निगेटिव्स - परचेजिंग रिव्यू

निगेटिव्स हाथ में आया. ठीक तीस अगस्त को मैंने ऑर्डर किया राज-कामिक्स के वेब साईट से. अभी तक के अच्छे अनुभव रहे हैं राज-कामिक्स के साईट से ऑर्डर करने के, मगर वह अनुभव ही क्या जिसमें खराब कुछ भी ना हो? सो इस बार ख़राब अनुभव मिलकर अनुभव का चक्र पूरा कर दिया राज कामिक्स ने. सिलसिलेवार ढंग से बताता हूँ.

1. तीस अगस्त को ऑर्डर किया, वह भी सबसे महंगे वाले कूरियर सर्विस से. मगर कामिक्स मिली पूरे आठ दिन बाद. शिकायत इस बात की नहीं कि आठ दिन बाद मिली. देरी किसी भी कारण से हो सकती है, सो इस मुआमले में छूट दे दी मैंने. शिकायत तो इस बात की ठहरी की मैं लगातार दो-तीन दिन से इन्हें मेल और फोन के जरिये संपर्क करना चाहा मगर इनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया.

2. कामिक्स की बात आगे के नंबरों में, फिलहाल तो अनुपम सिन्हा जी, मनीष गुप्ता जी और संजय गुप्ता जी द्वारा हस्ताक्षरित पन्ने को देख दिल खुश हो गया. मुझे पता है की उन्होंने कई कामिक्स पर बिलकुल यही शब्द अंकित किये होंगे, मगर लिखने के तरीके से यह नहीं लग रहा था की यह बस यूँ ही लिख दिया गया हो. अपनापन झलक रहा था उन शब्दों से... शुभकामनाएं...सप्रेम...आपका... मगर वहीं "युगांधर" कामिक्स पर संजय गुप्ता जी और मनीष गुप्ता जी के हस्ताक्षर देख ऐसा लगा जैसे मात्र खानापूर्ति की गई हो. खैर, उनकी भी अपनी कोई वजह और व्यस्तता रही होगी.

3. दफ़्तर से घर पहुंचा...कामिक्स हाथ में थी.. तो पहला काम "निगेटिव्स" को ही निपटाने का हुआ. पढ़ा, और सच कहूँ तो पढ़कर मजा नहीं आया. शायद मैंने बहुत अधिक अपेक्षा कर रहा था, जहाँ अधिक अपेक्षा रहती है वहीं हम निराश भी होते हैं. एक पल को तो लगा की शायद मैं अब रेणु, निर्मल वर्मा, एंगल, गैब्रियल मार्केज जैसे लेखकों को पढ़ते-पढ़ते कामिक्स का लुत्फ़ ही उठाना भूल गया था. मगर निगेटिव्स को पढने के बाद जब साथ आये अन्य ध्रुव के कामिक्स को पढ़ा तो लगा कि मैं अभी भी लुत्फ़ उठाता हूँ..मतलब यही की कहीं कुछ कमी थी. शायद मैं कम से कम "नागायण" के टक्कर की उम्मीद तो कर ही रहा था. दरअसल होता यह है की एक बार जब हम किसी भी कला के श्रेष्ठता को देख लेते हैं तो उम्मीदें भी वैसी ही हो जाती है. शायद उतनी अपेक्षा ना होती तो बेहतरीन लगती.

4. आखिर में ग्रीन पेज पढ़ते वक़्त अधिक मजा आया. अनुपम सिन्हा जी द्वारा लिखा गया ग्रीन पेज उनके बिलकुल दिल से निकालता सा लगा. इस कामिक्स के आदि से अंत तक बेहद विस्तार से बताया उन्होंने. क्या-क्या परेशानियाँ आई, और उससे उन्होंने कैसे पार पाया. एक साथ कैसे कई प्रोजेक्ट्स पर काम करते रहे. वगैरह-वगैरह बातों से यह साफ़ झलक रहा था की कितने जुझारू और अपने काम के प्रति कितने कर्तव्यनिष्ठ हैं वह.

5. आखिरी बात...अपने इस कामिक्स ब्लॉग के एक मोडरेटर आलोक शर्मा को ग्रीन पेज में देख उत्साह अपने चरम पर था...वाकई मजा आ गया उन्हें ग्रीन पेज पर देख कर.. :-)

रेटिंग : **** आऊट ऑफ़ फाईव.

आप सोच रहे होंगे की इतनी आलोचना के बाद भी चार रेटिंग कैसे? तो दोस्तों वह इसलिए क्योंकि कामिक्स वाकई शानदार है. चाहे पेज क्वालिटी हो या कहानी या चित्रांकन. बस मुझे उतना पसंद इसलिए नहीं आया क्योंकि मैं बहुत अपेक्षा रख रहा था. आखिर इतने सालों से अनुपम सिन्हा जी इस पर काम कर रहे हैं तो मेहनत रंग क्यों ना लाएगी?

Saturday, April 24, 2010

नागायण - वरणकांड

यह कामिक्स श्रृंखला मेरी नजर में राज कामिक्स का अभी तक के बिक्री का सारा रिकार्ड तोड़ डाले थे.. आज मैं इसके पहले भाग का प्रस्तावना जैसा ही कुछ ले कर आया हूँ, जिसमे इसके प्रमुख पात्रों का जिक्र है..

मैंने जब से ये ब्लॉग शुरू किया है तभी से अपने ही बनाये इस नियम को मानता चला आ रहा हूँ कि मैं कोई भी ऐसा कामिक्स का लिंक यहाँ ना दूँ जो पिछले दो वर्षों मे आया हो या फिर अभी भी उसकी खूब बिक्री हो रही हो.. मैं कुछ भी ऐसी सामग्री यहाँ नहीं डालना चाहता हूँ, जिससे कामिक्स इंडस्ट्री पर कुछ भी बुरा असर ना हो, जिससे भविष्य में और भी कामिक्स पढ़ने को मिले.. :) मगर फिर भी मुझे अफ़सोस के साथ कहना पर रहा है कि लगभग सभी नई-पुरानी कामिक्स इस अंतर्जाल पर कहीं ना कहीं बिखरे पड़े हैं..

फिलहाल तो आप इस कामिक्स के कुछ झलकियाँ देखें..

प्रमुख पृष्ठ :



नागराज :



ध्रुव :



नागपाशा :



नताशा :



विसर्पी :



बाबा गोरखनाथ :


Saturday, January 17, 2009

राज कामिक्स मेरा जूनून

मैं मेरठ से दिल्ली 8 मार्च को 3 बजे दिन मे पहूंचा और रिगल, कनाट प्लेस के पास चला गया क्योंकि वहां मुझसे मिलने वंदना आ रही थी.. लगभग आधे घंटे बाद वो आई और उसके साथ मैं लगभग 4:45 तक रहा.. फिर वहां से हम दोनों ही पैदल ही टहलते हुये नई दिल्ली रेल्वे स्टेशन की तरफ बढ चले.. मेरा अपना अनुमान था की रीगल से स्टेशन तक जाने में लगभग 20 मिनट लगना चाहिये और मेरी ट्रेन 5:20 पर थी.. मतलब मेरे पास 15 मिनट बच रहा था अपनी ट्रेन पकड़ने के लिये..

मेरा अनुमान ट्रैफिक ने गलत साबित कर दिया और जब मैं स्टेशन पहूंचा तो 5:10 हो रहे थे.. अब मैंने वंदना को कहा की अब आप यहीं से वापस जाओ क्योंकि अगर मैं आपके लिये प्लेटफार्म टिकट लिया तो मुझे मेरी ट्रेन छोड़नी परेगी.. फिर उससे विदा लेकर प्लेटफार्म के अंदर घुस गया.. मैं पहाड़गंज के तरफ से अंदर गया था और पिछली बार जब मैंने संपूर्णक्रांती पकड़ी थी तो वह 9 या 10 नंबर से रवाना होती थी.. सो मुझे पता था की मेरे पास ज्यादा समय नहीं है.. इस बार तो वह 12 से जाने वाली थी..

मैं लगभग भागते हुये 12 नंबर पहूंचा.. समय देखा तो 4 मिनट बचे हुये थे.. सामने देखा तो S1 डब्बा था और मुझे B3 में जाना था.. मैंने कुली से पूछा की B3 कहां है तो पता चला की S1 से S10, फिर एक पैंट्री कार है और उसके बाद B1, B2 फिर जाकर B3 है.. मैंने फिर से भागना शुरू किया मगर मन में ये तसल्ली थी की ट्रेन अब नहीं छूटने वाली है..

बचपन से ही हम बच्चों के लिये ट्रेन से सफर करने का मतलब कोई कामिक या कहानी की किताब और ढेर कुछ ना कुछ खाते जाना होता था.. अब भैया दीदी तो सुधर गये हैं मगर मैं अपने घर का बच्चा होने का कर्तव्य अभी भी निभा रहा हूं.. :D जब मैं अपने डब्बे की तरफ भाग रहा था तभी मुझे एक किताब की दुकान पर कामिक दिख गई.. अब तो मैं सोचा चाहे दौड़कर ही मुझे ट्रेन पकड़नी परे मगर मैं पहले कामिक तो जरूर खरीदूंगा.. मैं अभी तक कामिक पढने का शौकीन हूं मगर चेन्नई में मुझे हिंदी कामिक नागराज, ध्रुव, डोगा वाली नहीं मिलती है.. मगर मैं भी पीछे नहीं हूं.. नेट से राज कामिक के साईट पर जाकर खरीदता हूं.. सो अधिकतर कामिक मेरी पढी होती है.. मैंने उसके पास जितनी कामिक थी वो सारी जल्दी-जल्दी में पलट डाली और 4 कामिक निकाल कर उसे दिया और कहा, "कितने का हुआ भैया, जल्दी बताओ.." वो हक्का बक्का होकर मेरा चेहरा देख रहा था.. सोच रहा होगा की इतना बड़ा होकर भी बच्चों वाला शौक.. :) मगर मुझे जो अच्छा लगता है मैं बस वही करता हूं.. आज तक दुनिया की कभी परवाह नहीं कि की दुनिया क्या सोचती है.. उसने मुझे बताया 120 की हुई.. मैंने बिना दाम जोड़े ही उसे 120 पकड़ाये और फिर दौड़ पड़ा अपने डब्बे की तरफ.. डब्बे पर अपना नाम चेक किया और डब्बे में चढ गया.. जब तक मैं अपनी सीट तक पहूंचता तब-तक ट्रेन खुल गई.. बाद में मैंने दाम जोड़े तो बिलकुल सही पाया.. :)



राज कामिक्स मेरा जूनून आजकल राज कामिक्स का पंच लाईन बना हुआ है जिसे मैंने शीर्षक के रूप में प्रयोग किया है..:) अभी कुछ दिन पहले नागराज के ऊपर सिनेमा बनाने के लिये एक अमेरिकन स्टूडियो ने राज कामिक्स के साथ करार भी किया है.. उम्मीद है अगले साल तक वो सिनेमा हमारे बीच भी होगी..

मैंने यह लेख बहुत पहले 29 मार्च सन 2008 को अपने ब्लौग छोटी सी दुनिया के लिये लिखा था जिसे आज मैं यहां भी पोस्ट कर रहा हूं और यही वह पोस्ट है जिसने मुझे यह ब्लौग बनाने की प्रेरणा दी थी.. ध्रुव कि अगली कामिक्स मैंने मारा ध्रुव को और हत्यारा कौन मैं अगले पोस्ट में लेकर आता हूं..
धन्यवाद..