Saturday, August 23, 2008

मिट्टी की खुश्बू लिये एक लोककथा

एक गुणे चार

राजस्थानी लोककथाओं में विविधता है, रोचकता है.. ना जाने कब से कही सुनी जाती रही है, कही सुनी जाती रहेंगी.. लोक कथायें कुछ बड़ी होती है कुछ छोटी.. जैसे यह छोटी लोककथा.. एक गुणे चार..










16 comments:

  1. बहुत बहुत धन्यवाद इसे पसंद करने के लिये.. अगले अंक में शैलबाला के कुछ कारनामे लेकर आऊंगा मैं.. :)

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  2. भाई जी मेने यहां से नही ली, पर आप की यह कहानी भी अच्छी है,
    धन्यवाद

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  3. बहुत मजेदार ! अगली की प्रतीक्षा है ! शुभकामनाएं !

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  4. Ho!! yeh Comic tumne Bal Hans Se le hai. meri bachpan ke yaad taaza ho gain.

    very very THANKS
    Usman Ali Khan
    Usman.max@gmail.com

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  5. वाह PD मजा आ गया, आज ये कामिक्स मैंने अपने बेटे को पढ़कर सुनाई तो उसे भी पता चल गया कि "संगठन में शक्ति है"।

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    1. भूल ही गया था दोस्त. लाता हूँ, एक-दो हफ्ते का समय दिया जाए. :)

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    3. बचपन की याद ताज़ा कर दी आपने। I used to own this comic as a kid but lost it. while searching for it i came across your blog. Great job! could you please upload the entire comic it would mean a lot. thanks in advance :-)

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    1. मोहित जी, पूरी कामिक्स यहाँ पिक्चर इमेज के रूप में है. आप या तो यहीं पढ़ लीजिये या फिर इसे सेव कर लीजिये. और अगर आप इसका ई-कामिक्स ही चाहते हैं तो कृपया बता दें, मैं उपलोड कर देता हूँ.

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  8. अजी साहब, बालहंस की जितनी भी copies है सब की सब scan करके upload कर दीजिये फटाफट।
    धन्यवाद

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